Ancestral Property Distribution: अब अपनी पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा कैसे करें अपने नाम

By Smriti Agarwal

Published On:

भारत में पैतृक संपत्ति को लेकर अक्सर विवाद और भ्रम देखने को मिलता है। कई लोग यह नहीं समझ पाते कि उन्हें अपने परिवार की जमीन या घर में कितना हिस्सा मिलता है। पैतृक संपत्ति वह होती है जो चार पीढ़ियों से चली आ रही हो, जैसे दादा, परदादा और उससे पहले की संपत्ति। कानून के अनुसार इसमें आपका अधिकार जन्म से ही बन जाता है, चाहे संपत्ति आपके नाम पर हो या नहीं।

कानूनी आधार और समान अधिकार

पैतृक संपत्ति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस कानून के अनुसार बेटा और बेटी दोनों को समान अधिकार दिया गया है। 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी बेटों की तरह बराबरी का हिस्सा मिलने लगा है। इसका मतलब है कि शादीशुदा या अविवाहित होने से उनके अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

Also Read:
गैस सिलेंडर लेने वालों को झटका, LPG बुकिंग नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

हिस्से का निर्धारण कैसे होता है

पैतृक संपत्ति में हिस्सा स्थायी नहीं होता, बल्कि समय के साथ बदलता रहता है। जैसे-जैसे परिवार में नए सदस्य जन्म लेते हैं, हिस्से का विभाजन बदलता है। पहले संपत्ति पिता या दादा के बच्चों में बराबर बंटती है, फिर उनके बच्चों में आगे बांटी जाती है। इसी कारण इसे डायनामिक हिस्सा माना जाता है।

मां का अधिकार क्या होता है

Also Read:
Petrol-Diesel Price Hike: नायरा ने 5 रुपये तक बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, आम आदमी को बड़ा झटका

मां को पैतृक संपत्ति में सीधे तौर पर कॉपार्सनर का दर्जा नहीं मिलता, लेकिन वह अपने पति के हिस्से की उत्तराधिकारी होती है। यदि पति की मृत्यु हो जाती है, तो उनका हिस्सा मां को मिल जाता है। यह एक महत्वपूर्ण बात है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

अपने हिस्से का दावा कैसे करें

अपने अधिकार को साबित करने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि संपत्ति वास्तव में पैतृक हो। इसके लिए पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जरूरत होती है। इसके बाद आपको यह दिखाना होता है कि आप उस परिवार के सदस्य हैं और आपका जन्म उस वंश में हुआ है। पहचान से जुड़े दस्तावेज इसमें मदद करते हैं।

Also Read:
LPG Shortage: नहीं मिलेगा घरेलू गैस सिलेंडर! सरकार के एक आदेश ने बढ़ाई चिंता, इन लोगों को लेना होगा ऐसा नया कनेक्शन

बंटवारा और कानूनी प्रक्रिया

यदि परिवार के सभी सदस्य सहमत हों, तो आपसी समझौते से संपत्ति का बंटवारा किया जा सकता है। इसे फैमिली सेटलमेंट कहा जाता है और यह सबसे आसान तरीका होता है। यदि सहमति नहीं बनती, तो कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इसके तहत रजिस्ट्री के माध्यम से पार्टिशन डीड बनाई जा सकती है या फिर कोर्ट में केस दायर किया जा सकता है।

बंटवारे के बाद क्या बदलता है

Also Read:
LPG सिलेंडर बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव: अब तय समय के बाद ही कर पाएंगे बुकिंग LPG Cylinder Booking

जब पैतृक संपत्ति का बंटवारा हो जाता है, तो वह व्यक्तिगत संपत्ति बन जाती है। इसके बाद अगली पीढ़ी उसमें जन्म से अधिकार नहीं जता सकती। इसलिए बंटवारे का फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी होता है।

निष्कर्ष

पैतृक संपत्ति में अधिकार पाना हर व्यक्ति का कानूनी हक है, लेकिन इसके लिए सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। यदि परिवार में आपसी सहमति हो तो प्रक्रिया आसान हो जाती है, अन्यथा कानून आपके अधिकार की रक्षा करता है।

Also Read:
इंतजार खत्म! पीएम किसान की 22वीं किस्त की तारीख घोषित PM Kisan Yojana

Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। संपत्ति से जुड़े नियम और प्रक्रिया अलग-अलग मामलों में भिन्न हो सकती है। किसी भी कानूनी निर्णय से पहले योग्य वकील या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Also Read:
अब नहीं होगी गैस की टेंशन! 40% कम हुई बुकिंग, सरकार के बड़े एक्शन LPG Cylinder

Leave a Comment